छत्तीसगढ़:-नए विधायक बने है संगठन को पहले जानिए तब सवाल उठाएं,विधायक ने किया था शिकायत,स्मृति ईरानी ने दिया दो टूक जवाब.पहले क्षेत्र में करे काम

रायपुर: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय नेत्री और छत्तीसगढ़ की प्रभारी स्मृति ईरानी के हालिया दौरे के बाद प्रदेश की राजनीति में अंदरखाने चर्चाओं का दौर तेजी से शुरू हो गया है। इस दौरे के बाद कई ऐसी बातें और किस्से राजनीतिक गलियारों में तैर रहे हैं, जो एक तरफ जहाँ कुछ नेताओं के लिए एक बड़ा सबक माने जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ के लिए यह किसी सिरदर्द से कम नहीं हैं। भले ही पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन बंद कमरे की बैठकों से छनकर बाहर आ रही बातें इन दिनों राज्य की राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बनी हुई हैं।

बंद कमरे की बैठक और सूत्रों के दावे सूत्रों के अनुसार, राजधानी रायपुर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में जब मैराथन और समीक्षा बैठकों का दौर चल रहा था, तब कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस दौरान पार्टी के भीतर सांगठनिक नियुक्तियों, क्षेत्र के कामकाज और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय को लेकर कुछ तीखी और दिलचस्प बातें सामने आईं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि बैठक में साजा से नवनिर्वाचित विधायक ईश्वर साहू द्वारा क्षेत्र में होने वाली नियुक्तियों और कार्यप्रणाली को लेकर कुछ सवाल या बातें रखी गईं, जिसके बाद बैठक का माहौल काफी रोचक हो गया।
नेतृत्व की दो टूक: ‘संगठन की कार्यप्रणाली को समझें’ सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि इस वाकये के बाद केंद्रीय नेत्री स्मृति ईरानी और प्रदेश नेतृत्व की ओर से बेहद स्पष्ट और दो टूक संदेश दिया गया। सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व की तरफ से यह बात सामने आई कि जो विधायक अभी राजनीति और संगठन के लिहाज से नए हैं, उन्हें पार्टी के सांगठनिक ढांचे, उसकी कार्यशैली और अनुशासन को पूरी तरह समझने की जरूरत है। संगठन कैसे काम करता है और उसके नियम क्या हैं, इसकी पूरी जानकारी के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए तथा अनावश्यक मामलों में पड़ने के बजाय अपने संबंधित क्षेत्रों के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस दो टूक रुख को पार्टी के भीतर अनुशासन और व्यवस्था का कड़ा संदेश माना जा रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर चूंकि यह पूरी बैठकें मीडिया की नजरों से दूर और बंद कमरे के भीतर हुईं, इसलिए पार्टी के किसी भी आधिकारिक मंच से इस पर कोई पुष्टि या बयान जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद, सूत्रों के हवाले से बाहर आई इन अंदरूनी कहानियों और चर्चाओं ने छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच का यह तालमेल किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
खबर सोर्स..( दै. भा.)



