छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ पूर्व सांसद अपने बेटी के ट्रांसफर के लिए 2 साल से थे परेशान,प्रदेश प्रभारी के हस्तक्षेप के बाद रातों रात मुख्यमंत्री ने किया ट्रांसफर

रायपुर:-हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरे पर आईं भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के सामने एक ऐसा वाकया सामने आया, जिसने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलई खोलकर रख दी है। रविवार को मुख्यमंत्री और दोनों उप-मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई खास बैठक में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मंत्रियों के खिलाफ जमकर मोर्चा खोल दिया। सभी ने एक सुर में शिकायत की कि राज्य में मंत्रियों के दरवाजे उनके लिए बंद हैं और उनकी छोटी-छोटी सिफारिशें व काम तक सुने नहीं जा रहे हैं।

इसी बैठक के दौरान पूर्व सांसद गोविंद मिरी ने अपनी दर्द भरी दास्तान सुनाई, जिसने सबको सन्न कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वे अपनी बेटी के तबादले (ट्रांसफर) के लिए पिछले ढाई साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। यह हाल देखकर खुद स्मृति ईरानी भी हैरान रह गईं। मामला गंभीर था, इसलिए उन्होंने बिना वक्त गंवाए शाम को सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात की और पूरी स्थिति से अवगत कराया। सीएम साय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत एक्शन लिया और रातों-रात फाइल मंगवाकर ट्रांसफर आर्डर जारी करवा दिया।
अगले दिन जब मुख्यमंत्री कार्यालय में आदेश की कॉपी पहुंची, तो संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह के जरिए इसे पूर्व सांसद तक पहुंचाया गया। एक तरफ इस त्वरित कार्रवाई से न्याय तो मिल गया, लेकिन इस पूरे वाकये ने छत्तीसगढ़ बीजेपी के भीतर सुलग रहे असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चर्चा आम हो गई है कि अगर मंत्रियों का रवैया ऐसा ही रहा और कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हुई, तो आने वाले 2028 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी कठिनाई खड़ी हो सकती है।



