रामानुजनगर विकासखंड में धान खरीदी बना ‘खेला’, सहकारी समितियों में खुलेआम व्यापारियों का धान खपाने का खेल, प्रशासन मौन

रामानुजनगर विकासखंड में इन दिनों धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। सहकारी समितियों में नियम-कानून को ताक पर रखकर व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर धान खपाया जा रहा है, और हैरानी की बात यह है कि यह सब खुलेआम, दिनदहाड़े और प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। सुबह से ही बड़ी-बड़ी गाड़ियों में भरकर व्यापारी धान लेकर किसानों के यहां पहुंच रहे हैं और यही धान बिना किसी रोक-टोक के खपाया जा रहा है।
गंभीर बात यह है कि सूरजपुर जिले की कई सहकारी समितियों में पहले ही धान का भारी शॉर्टेज सामने आ चुका है, जिसकी मात्रा करोड़ों रुपये बताई जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि यह शॉर्टेज आखिर पूरा कैसे किया जा रहा है? स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं कि रामानुजनगर विकासखंड में व्यापारियों का धान खपाकर उसी शॉर्टेज की भरपाई की जा रही है, ताकि कागजों में सब कुछ “मैनेज” दिखाया जा सके।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात प्रशासनिक सुस्ती और चुप्पी है। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे धान खरीदी पर निगरानी रखें, वही अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। जब बार-बार अधिकारी और व्यापारियों के बीच सेटिंग की बातें सामने आ रही हैं, तो फिर उच्च अधिकारी इस पर कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर किसी बड़े खेल की तैयारी?
धान खरीदी जैसे संवेदनशील मामले में अगर व्यापारी हावी हो जाएं और वास्तविक किसानों का हक मारा जाए, तो यह सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्था पर सीधा हमला है। अब सवाल यह नहीं रह गया कि गड़बड़ी हो रही है या नहीं, सवाल यह है कि सूरजपुर जिले में इतने बड़े पैमाने पर यह सब आखिर किसके संरक्षण में हो रहा है?
यदि समय रहते स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़ा घोटाला बन सकता है। रामानुज नगर विकासखंड की सहकारी समितियों में चल रहे इस खेल ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।




