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धान खरीदी पर निगरानी या सिर्फ औपचारिकता? रामानुजनगर में उठ रहे कई सवाल

सूरजपुर।रामानुजनगर विकासखंड में धान खरीदी सीजन के दौरान प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बिचौलियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से की जा रही जांच की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है, खासकर इसके क्रियान्वयन को लेकर,स्थानीय सूत्रों और व्यापार से जुड़े लोगों के अनुसार, धान परिवहन से संबंधित गाड़ियों को विभिन्न मार्गों पर जांच के लिए रोका जा रहा है। बताया जा रहा है कि इनमें से कई गाड़ियों को संबंधित अधिकारी द्वारा रोका भी गया है,और ज्यादातर गाड़ियों में अवैध धान भी पाए गए है, लेकिन इसके बावजूद उन व्यापारियों और वाहनों पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिला है। जबकि नियमों के अनुसार, अवैध तरीके से धान का परिवहन पाए जाने पर संबंधित वाहन को जप्त किए जाने का प्रावधान है। ऐसे में कार्रवाई न होने से कई तरह के संदेश क्षेत्र में जा रहे हैं, जिस पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
इसी बीच एक शासकीय वाहन को लेकर क्षेत्र में विशेष चर्चा है, जिसे कई बार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय देखा गया है। बताया जा रहा है कि कुछ मौकों पर अधिकारी की उपस्थिति के बिना ही उक्त वाहन के माध्यम से जांच की जाती है। इस पूरे घटनाक्रम में वाहन चालक की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से धान को सहकारी समितियों तक पहुंचाए जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि अब तक कई गाड़ियों द्वारा नियमों के विपरीत धान का परिवहन किया गया है। हालांकि, इन तथ्यों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन चर्चाओं ने निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न जरूर लगाया है।
शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिचौलियों का धान किसी भी स्थिति में सहकारी समितियों में न पहुंचे। लेकिन इसके उलट हजारों क्विंटल धान सहकारी समितियों में खपाया जा चुका है।
फिलहाल पूरा मामला चर्चाओं और सवालों के दायरे में है। आवश्यकता है कि संबंधित विभाग स्थिति को स्पष्ट करे और यह बताए कि नियमों के अनुसार जांच के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया क्या है, ताकि धान खरीदी व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम या संदेह न बना रहे।

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