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रामानुजनगर तहसील में अव्यवस्था का आलम, तहसीलदार की अनुपस्थिति से जनता त्रस्त

रामानुजनगर तहसील कार्यालय इन दिनों अव्यवस्था और लापरवाही का केंद्र बनता जा रहा है। तहसीलदार के लगातार कार्यालय में अनुपस्थित रहने के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तहसीलदार  केवल आधे से एक घंटे के लिए कार्यालय आते हैं और सीमित लोगों के काम निपटाकर तुरंत निकल जाते हैं। इससे दूर-दराज़ से आने वाले ग्रामीणों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। रोज़ाना बड़ी संख्या में लोग सीमांकन, बंटवारा, नामांतरण जैसे जरूरी कार्यों के लिए तहसील पहुंचते हैं, लेकिन अधिकारी के नहीं मिलने से उनके काम लंबित ही रह जाते हैं। कई आवेदक बताते हैं कि पेशी के दिन भी तहसीलदार के अनुपस्थित रहने से उनकी फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है।
स्थिति को और गंभीर बनाती है तहसील कार्यालय में पनप रही कथित दलाली प्रथा। आरोप है कि दलालों के माध्यम से आने वाले काम तेजी से निपटाए जाते हैं, जबकि आम नागरिकों को लंबे समय तक चक्कर काटने पड़ते हैं। एक आवेदक, जिसने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि उसने कई दिनों पहले बंटवारे के लिए आवेदन दिया था, लेकिन पेशी के दिन यह पता चलता है कि तहसीलदार कार्यालय में मौजूद ही नहीं हैं। इससे स्पष्ट होता है कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी है। आम जनता का कहना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली से उनके मन में प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इस संबंध में जब रामानुज नगर के एसडीएम से बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा, “ऐसी कोई शिकायत अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं आई है। फिर भी मैं तहसीलदार से कार्यालय में नियमित रूप से बैठने के लिए समय निर्धारित करने को कहूंगा, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। आम जनता की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।” एसडीएम के इस बयान के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही व्यवस्था में सुधार देखने को मिल सकता है।

वहीं, इस पूरे मामले पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पवन सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “प्रदेश सरकार आम जनता को पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रशासन को जनहित में काम करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो यह गंभीर विषय है। मेरे पास भी कई बार आम जनता का फोन आता है कि तहसीलदार तहसील में कम बैठते है,तहसीलदार को चाहिए कि वे अपनी जिम्मेदारी समझें, नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहें और आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण करें। जनप्रतिनिधि होने के नाते हमारी प्राथमिकता जनता की सुविधा है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।”
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो जनता आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हो सकती है। फिलहाल, प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और आम जनता जवाबदेही की मांग कर रही है।

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