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रामानुजनगर तहसीलदार को लेकर टकराव तेज, मुख्यमंत्री के पास पहुंचा शिकायत, क्या प्रशासन आंदोलन का इंतजार कर रहा है?


सूरजपुर जिले के रामानुजनगर में तहसीलदार की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में जिला सरपंच संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम लिखित ज्ञापन सौंपकर रामानुजनगर तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में अमर सिंह (जिला अध्यक्ष), राम सिंह टेकाम, बृजलाल एवं सुंदरलाल सहित अन्य सरपंच एवं जनप्रतिनिधि शामिल रहे। ज्ञापन में तहसीलदार पर अवैध लेन–देन किए जाने का सीधा आरोप लगाया गया है। सरपंच संघ ने इस दौरान मुख्यमंत्री के सामने स्पष्ट किया है कि तहसीलदार जैसे बड़े और जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी पर इस प्रकार के आरोप किसी भी स्थिति में सामान्य या हल्के नहीं माने जा सकते। यदि किसी संवैधानिक पद पर आसीन अधिकारी द्वारा नियमों के विपरीत आर्थिक लेन–देन किया जा रहा हो, तो यह प्रशासनिक मर्यादा और जनविश्वास—दोनों के लिए गंभीर विषय है। इसी आधार पर संघ ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
सरपंच संघ के अनुसार तहसीलदार की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी समय–समय पर आपत्तियां सामने आती रही हैं, 40 लाख के धान घोटाले में सहयोग करना, व्यापारियों का धान खुलेआम बेचवाने में सहयोग करना, किसानों को परेशान करना, ऐसी कोई गंभीर आरोपों के बीच अब लेन–देन से जुड़े आरोपों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि तहसीलदार की भूमिका राजस्व, प्रशासन और जनता से सीधे जुड़ी होती है, ऐसे में उस पद पर बैठे अधिकारी पर आर्थिक अनियमितताओं की आशंका प्रशासन की साख पर सीधा असर डालती है। इसी कारण सरपंच संघ ने खुलकर यह घोषणा कर दी है कि यदि तीन दिवस के भीतर तहसीलदार के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो रामानुज नगर में आंदोलन किया जाएगा। संघ का कहना है कि यह चेतावनी किसी दबाव की राजनीति के लिए नहीं, बल्कि प्रशासन का ध्यान गंभीरता से आकृष्ट कराने के उद्देश्य से दी गई है, ताकि भविष्य में स्थिति और न बिगड़े।
इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब जनप्रतिनिधि संगठित होकर मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचा चुके हों, आंदोलन की खुली घोषणा कर दी गई हो और जनता में भी नाराजगी सामने आ रही हो, तब कार्रवाई में देरी कई आशंकाओं को जन्म देती है। उल्लेखनीय है कि सूरजपुर जिले में कलेक्टर के नेतृत्व में प्रशासनिक व्यवस्था को सामान्य तौर पर संतुलित और संवेदनशील माना जाता रहा है, लेकिन रामानुज नगर तहसीलदार को लेकर उपजा यह विवाद अब जिला प्रशासन की समग्र छवि को भी प्रभावित कर रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब जनता और निर्वाचित प्रतिनिधि किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं, तो प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि वह समय रहते निष्पक्ष निर्णय लेकर स्थिति को स्पष्ट करे। अब देखना यह है कि प्रशासन आंदोलन से पहले कार्रवाई करता है या फिर हालात और गंभीर होने का इंतजार किया जा रहा है।

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