रामानुजनगर सड़क निर्माण में भारी अनियमितता, सांसद चिंतामणि महाराज ने जताई नाराजगी

रामानुजनगर विकासखंड अंतर्गत कूड़ेली माजा से राजापुर तक करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित की जा रही सड़क में घटिया निर्माण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार लिखित शिकायतें देने तथा समाचार पत्रों में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद अब तक न तो ठेकेदार पर कोई कार्रवाई की गई और न ही निर्माण की गुणवत्ता में कोई सुधार देखने को मिला है।यह सड़क पिछले तीन वर्षों से निर्माणाधीन है, लेकिन निर्माण की गति और गुणवत्ता दोनों ही गंभीर संदेह के घेरे में हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा बेहद निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सड़क बनने के साथ ही उखड़ने लगी है। रामानुजनगर मुख्यालय में लगभग दो किलोमीटर लंबी सीसी रोड और नाली का निर्माण भी इसी परियोजना के अंतर्गत किया जा रहा है, लेकिन स्थिति यह है कि एक ओर सड़क का निर्माण होता है तो दूसरी ओर वही सड़क टूटने और उखड़ने लगती है।सड़क निर्माण के कारण पूरे नगर में धूल का गुबार छाया हुआ है, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राहगीरों, व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो रही हैं। इन तमाम अनियमितताओं को लेकर कई नागरिकों ने जिला कलेक्टर सहित पीडब्ल्यूडी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित शिकायतें सौंपी, लेकिन अब तक न कोई जांच हुई और न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई। इससे जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
गुरुवार को जब सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज रामानुजनगर प्रवास पर पहुंचे और इसी सड़क से होकर गुजरे, तो उड़ती धूल और सड़क की बदहाल स्थिति देखकर वे स्वयं अचंभित रह गए। बाद में अधिकारियों की बैठक के दौरान उन्होंने विभाग के अधिकारियों से सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल-जवाब किए, लेकिन अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
इस पर सांसद चिंतामणि महाराज ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस सड़क निर्माण को लेकर उन्हें कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि सड़क निर्माण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी अधिकारी या ठेकेदार दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।अब सांसद के संज्ञान में आने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच कब तक होती है और इसमें किन अधिकारियों व ठेकेदारों पर गाज गिरती है। फिलहाल रामानुजनगर की जनता को उम्मीद है कि इस बार कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी।




