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रामानुजनगर तहसीलदार पर फिर गंभीर आरोप, सरपंच ने कलेक्टर को लिखा  पत्र, तीन दिन में कार्रवाई की मांग नहीं तो होगा आंदोलन

रामानुजनगर:- विकासखंड रामानुजनगर में धान खरीदी के दौरान तहसीलदार की भूमिका को लेकर उठे सवालों के बाद अब उनके खिलाफ एक और गंभीर आरोप सामने आया है। ग्राम पंचायत रामानुजनगर के निर्वाचित सरपंच राम सिंह ने तहसीलदार के विरुद्ध कलेक्टर को शिकायत पत्र लिखा है, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रेत ढुलाई करने वाले ट्रैक्टरों से अवैध रूप से राशि वसूली और भारी लेन–देन का आरोप लगाया गया है। पत्र में सरपंच ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि जनपद पंचायत रामानुज नगर अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हैं, जिनके निर्माण के लिए ग्रामीणों द्वारा आसपास की छोटी नदियों से रेत ढुलाई की जाती है। आरोप है कि इस कार्य में लगे ट्रैक्टरों को तहसीलदार द्वारा रोककर उनसे राशि की मांग की जाती है और राशि नहीं देने पर कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूरे क्षेत्र में किसी भी नदी पर वैध रेत खनन का पट्टा जारी नहीं है, इसके बावजूद केवल पीएम आवास निर्माण से जुड़े वाहनों पर ही सख्ती बरती जा रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। सरपंच ने पत्र में यह भी लिखा है कि इस प्रकार की कार्रवाई से गरीब हितग्राहियों के आवास निर्माण कार्य बाधित हो रहे हैं और जनता में भारी असंतोष है।
सरपंच संघ ने इस शिकायत को गंभीर बताते हुए प्रशासन को तीन दिवस के भीतर तहसीलदार के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो रामानुजनगर में आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी धान खरीदी प्रक्रिया जिसमें 40 लाख के धान का उलट फेर करने में  तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ चुके हैं और अब प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा यह मामला सामने आना प्रशासनिक निष्क्रियता को और उजागर करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसीलदार की कार्यशैली से जनता लगातार परेशान है और इसका सीधा असर शासन की छवि पर पड़ रहा है। इतने बड़े बड़े कारनामों के बीच लगातार खबरों में प्रकाशित करने के बाद भी अब तक न तो किसी जांच की जानकारी दी गई है और न ही प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। जानकारों का मानना है कि जब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि कलेक्टर को  शिकायत लिख कर कार्रवाई की मांग कर रहा है, तब प्रशासन का मौन रहना कई सवाल खड़े करता है। अब पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका और अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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