खबर के बाद धान खरीदी केंद्रों में हड़कंप, रामानुजनगर विकासखंड में भारी शॉर्टेज की चर्चा से मची अफरातफरी

सूरजपुर जिले में धान खरीदी का कार्य अंतिम चरण में है, लेकिन इसी बीच रामानुजनगर विकासखंड के कई धान खरीदी केंद्रों को लेकर गंभीर चर्चाएं सामने आ रही हैं। हमारे द्वारा धान खरीदी में संभावित शॉर्टेज और भौतिक सत्यापन न होने को लेकर खबर प्रकाशित किए जाने के बाद सहकारी समितियों और धान खरीदी केंद्रों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार विकासखंड के गणेशपुर, परशुरामपुर और पोड़ी धान खरीदी केंद्रों में हजारों क्विंटल धान की कमी होने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से गणेशपुर केंद्र को लेकर चर्चा है कि वहां कई हजार क्विंटल धान का शॉर्टेज हो सकता है।
सूत्रों का कहना है कि लगभग यही स्थिति रामानुजनगर विकासखंड की अन्य धान खरीदी केंद्रों में भी बनी हुई है, लेकिन अब तक किसी भी केंद्र का आधिकारिक शॉर्टेज आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्रशासन वास्तविक स्थिति सामने लाने से क्यों बच रहा है। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिन धान खरीदी केंद्रों में शॉर्टेज की चर्चा है, वहां पूरे खरीदी सत्र के दौरान एक बार भी भौतिक सत्यापन नहीं किया गया। कई केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकारियों द्वारा न तो नियमित निरीक्षण किया गया और न ही भौतिक मिलान की प्रक्रिया अपनाई गई।
कर्मचारियों और सूत्रों का दावा है कि यदि जिला प्रशासन सख्ती के साथ भौतिक सत्यापन कराए, तो केवल रामानुजनगर विकासखंड की सभी सहकारी समितियों को मिलाकर 30 से 35 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आ सकती है। हमारी खबर के सामने आने के बाद स्थिति तेजी से बदलती नजर आई। सूत्रों के अनुसार कई धान खरीदी केंद्रों के प्रभारी अचानक सक्रिय हो गए हैं और लगातार धान व्यापारियों से संपर्क कर किसी भी हाल में धान की आपूर्ति कराने का प्रयास किया जा रहा है।इतना ही नहीं, सूत्र यह भी बताते हैं कि रामानुजनगर विकासखंड तक ही सीमित न रहते हुए कोरिया जिले के कई राइस मिलर्स से भी धान खरीदी प्रभारी संपर्क कर रहे हैं, ताकि संभावित कमी को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। इससे यह सवाल और गहराता जा रहा है कि यदि पहले सब कुछ नियमों के अनुसार था, तो खबर के बाद अचानक यह भागदौड़ क्यों शुरू हुई।
इस पूरे मामले में जिला खाद्य अधिकारी संदीप भगत ने कहा कि “अगर ऐसा है तो कल साहब से बात कर जांच कराई जाएगी।”
अब देखना यह होगा कि प्रशासन वास्तव में भौतिक सत्यापन के आदेश जारी करता है या फिर यह मामला केवल चर्चाओं और सफाई तक ही सीमित रह जाता है।



