सूरजपुर कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्ति विवाद, जिला अध्यक्ष शशि सिंह ने लिखा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र

सूरजपुर:- सूरजपुर कांग्रेस संगठन में इन दिनों सब कुछ सामान्य नहीं दिख रहा है। सूरजपुर ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जिस तरह से जिला कांग्रेस अध्यक्ष शशि सिंह ने औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई है, वह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति जिला अध्यक्ष की सहमति के बिना कर दी गई? अगर ऐसा है, तो यह संगठनात्मक व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न है। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार सूरजपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष शशि सिंह ने सूरजपुर विकासखंड में ब्लॉक अध्यक्ष के नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को पत्र लिखा है। सूरजपुर ब्लॉक अध्यक्ष में फिलहाल शहर से अध्यक्ष बनाया गया है जबकि शशि सिंह की मनसा थी कि वहां का ब्लॉक अध्यक्ष किसी ग्रामीण क्षेत्र से बनाया जाए और उनके पसंद के कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी मिले लेकिन इसके उलट सूची जारी हो जाने से जिला अध्यक्ष शशि सिंह काफी असहज महसूस कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ब्लॉक अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष के बीच यदि आपसी समन्वय नहीं रहेगा, तो संगठन को जमीनी स्तर पर चलाना लगभग असंभव हो जाएगा। ब्लॉक अध्यक्ष संगठन की रीढ़ माने जाते हैं और जिला अध्यक्ष के निर्देशों पर ही पूरे जिले की राजनीतिक गतिविधियां संचालित होती हैं। ऐसे में यदि जिला अध्यक्ष स्वयं कह रही हैं कि नियुक्त ब्लॉक अध्यक्ष अपेक्षित रूप से काम नहीं कर पाएंगे, तो कांग्रेस संगठन के भविष्य को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
कांग्रेस में दो फाड़ साफ नजर आने लगा है
शशि सिंह की जिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के बाद से ही सूरजपुर कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। एक बड़ा गुट, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ और पुराने नेता शामिल बताए जाते हैं, उसने खुद को संगठनात्मक गतिविधियों से काफी हद तक अलग कर लिया है। यह गुट न तो नियमित बैठकों में सक्रिय नजर आ रहा है और न ही आंदोलनों व कार्यक्रमों में।
वहीं दूसरी ओर, जिला अध्यक्ष शशि सिंह अपनी एक नई और अपेक्षाकृत युवा टीम के साथ जिले में लगातार सक्रिय दिखाई दे रही हैं। धरना-प्रदर्शन, पार्टी के कार्यक्रम, जनसमस्याओं को लेकर आंदोलन—इन सभी में उनकी सक्रियता साफ देखी जा सकती है। इससे यह संकेत मिलता है कि संगठन के भीतर दो स्पष्ट ध्रुव बन चुके हैं।
समन्वय की कमी संगठन को कमजोर कर सकती है
अगर ब्लॉक अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष के बीच तालमेल नहीं बन पाया, तो इसका सीधा असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और पार्टी की जमीनी पकड़ पर पड़ेगा। आने वाले चुनावी दौर में यह स्थिति कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
अब शशि सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे संगठन के सभी गुटों को एकजुट कर साथ लेकर चलें। वरिष्ठ नेताओं को फिर से सक्रिय करना, असंतुष्ट कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना और ब्लॉक स्तर पर मजबूत समन्वय स्थापित करना—ये सभी उनके लिए एक कठिन परीक्षा है।
क्या इस चुनौती पर खरी उतर पाएंगी शशि सिंह?
यह सवाल अब पूरे जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। क्या शशि सिंह कांग्रेस को अंदरूनी कलह से बाहर निकालकर एक मजबूत और एकजुट संगठन खड़ा कर पाएंगी, या फिर गुटबाजी और असंतोष पार्टी को कमजोर करता चला जाएगा—इसका जवाब आने वाले दिनों में संगठन की गतिविधियों और फैसलों से ही मिलेगा।
फिलहाल इतना तय है कि ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्ति विवाद ने सूरजपुर कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को सार्वजनिक कर दिया है और अब पार्टी नेतृत्व के लिए इस पर समय रहते फैसला लेना बेहद जरूरी हो गया है।
