छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के फर्जी ट्रांसफर का खेल, 15 जिलों के डीईओ से मांगी रिपोर्ट

रायपुर (विकाश दुबे)। स्कूल शिक्षा विभाग में हुए थोक ट्रांसफर के बीच 19 शिक्षकों के फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर जारी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जाली आदेश के सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के 15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को पत्र जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस फर्जी ऑर्डर के आधार पर कई शिक्षकों को कार्यमुक्त कराकर नई जगहों पर कार्यभार ग्रहण भी कराया जा चुका है।

मिली जानकारी के अनुसार, अगस्त-सितंबर माह के दौरान शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर स्थानांतरण किए गए थे। इसी दौरान अज्ञात तत्वों द्वारा विभागीय लेटरहेड और स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव के फर्जी हस्ताक्षर व मुहर का दुरुपयोग करते हुए 19 शिक्षकों का फर्जी ट्रांसफर आदेश (क्रमांक ईएनएसटीबी-102755/2026/20-3) जारी कर दिया गया। एक ही ऑर्डर में कई शिक्षकों के प्रशासनिक तबादले को देखकर जब कुछ शिक्षकों को संदेह हुआ और पड़ताल की गई, तब इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ। जब मामला मुख्यालय पहुंचा तो स्पष्ट हुआ कि विभाग स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव या आदेश जारी ही नहीं हुआ था।

लोक शिक्षण संचालनालय ने रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, बस्तर, बलौदाबाजार-भाटापारा, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बलरामपुर-रामानुजगंज, राजनांदगांव, कांकेर, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, सरगुजा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के डीईओ को पत्र भेजा है। विभाग ने पूछा है कि फर्जी आदेश किस माध्यम से मिला, किन कर्मचारियों को इसके आधार पर कार्यमुक्त या पदभार ग्रहण कराया गया और मामला सामने आने के बाद क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई। वहीं, लगभग दो महीने तक बिना जांच-पड़ताल के फर्जी आदेश पर शिक्षकों को रिलीव और जॉइन कराने को लेकर जिला व ब्लॉक स्तर के अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा जगत में इस फर्जी ट्रांसफर के पीछे बड़े लेन-देन की आशंका जताई जा रही है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।



