राजस्व विभाग रामानुजनगर में कार्रवाई का दोहरा पैमाना: बालू पर सख्ती, गिट्टी परिवहन पर चुप्पी क्यों?

रामानुजनगर तहसील में अवैध खनन और परिवहन को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना में उपयोग होने वाली बालू के परिवहन पर तो प्रशासन द्वारा तत्काल कार्रवाई की जाती है, लेकिन उसी क्षेत्र में जंगलों से अवैध रूप से निकाली जा रही गिट्टी का परिवहन ट्रैक्टर और 407 जैसे वाहनों में रोजाना खुलेआम जारी है। यह गिट्टी परिवहन किसी छुपे रास्ते या चोरी-छिपे नहीं, बल्कि मुख्य मार्गों से होकर होता है, जिसे स्थानीय लोग और तहसीलदार जैसे अधिकारी रोज देखते हैं। इसके बावजूद इस पर ठोस कार्रवाई न होना राजस्व विभाग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए बालू ले जा रही एक गाड़ी को पकड़ने की कार्रवाई के दौरान एक आदिवासी सरपंच के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार का आरोप सामने आया। सरपंच का कहना है कि उन्होंने योजना के तहत बालू परिवहन में छूट और गाड़ी छोड़ने का आग्रह किया था, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। सरपंच के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री और कलेक्टर सहित उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भी की, लेकिन अब तक न तो उनकी गाड़ी छोड़ी गई और न ही उनके साथ हुए व्यवहार के मामले में कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने आई। यह स्थिति प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर भी सवाल खड़े करती है।
सबसे अहम प्रश्न यह है कि जब बालू के परिवहन को अवैध मानकर तत्काल कार्रवाई की जाती है, तो फिर जंगलों से निकल रही गिट्टी, जो ट्रैक्टर और 407 वाहनों में रोजाना ढोई जा रही है, उस पर वही नियम क्यों लागू नहीं होते? खनिज नियमों के अनुसार गिट्टी का अवैध उत्खनन और परिवहन भी अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद इस गतिविधि पर राजस्व विभाग की चुप्पी समझ से परे है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि गिट्टी से लदे वाहन नियमित रूप से एक तय रूट पर चलते हैं, लेकिन उन्हें रोकने या जांचने की पहल नहीं दिखाई देती।
प्रशासनिक कार्रवाई में यह असमानता अब केवल एक मामले तक सीमित नहीं रही है, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता से जुड़ गई है। यदि कानून वास्तव में सबके लिए समान है, तो फिर कार्रवाई भी समान रूप से होनी चाहिए। बालू और गिट्टी के मामलों में अलग-अलग रवैया अपनाया जाना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं नियमों के पालन में चयन किया जा रहा है। जनता यह जानना चाहती है कि क्या रामानुजनगर में अवैध गिट्टी परिवहन पर कार्रवाई की कोई स्पष्ट रणनीति है, या फिर यह मुद्दा लगातार अनदेखा किया जा रहा है।
यह मामला अब केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का बन चुका है। जरूरत है कि राजस्व विभाग सभी खनिज संसाधनों के मामले में एक समान मापदंड अपनाए और यह स्पष्ट करे कि कार्रवाई का आधार व्यक्ति या साधन नहीं, बल्कि कानून है। तभी प्रशासन पर जनता का भरोसा बना रह सकता है।



